
पेरिस। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका द्वारा पेश किए जा रहे अस्वीकार्य प्रस्तावों के खिलाफ यूरोप को खुलकर आवाज उठाने और उन्हें ठुकराने का पूर्ण अधिकार है। राजदूतों को संबोधित करते हुए बैरोट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीतियों से उपजी नाराजगी को रेखांकित किया, जो पारंपरिक गठबंधनों को कमजोर कर रही हैं।
ग्रीनलैंड को खरीदने की ट्रंप की मांग ने यूरोपीय देशों को झकझोर दिया है। यह खनिजों से भरपूर डेनिश क्षेत्र अमेरिकी सुरक्षा के लिए जरूरी बताया जा रहा है, लेकिन बैरोट ने इसे यूरोपीय एकता पर हमले के रूप में देखा। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका को हमारे रिश्तों पर पुनर्विचार का अधिकार है, लेकिन हमें भी ऐतिहासिक साझेदार को ना कहने का हक है।’
बैरोट ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अमेरिका के बराबर खतरा करार दिया। पूर्वी यूरोप में घुसपैठ, व्यापारिक दबाव और ग्रीनलैंड जैसे दावों को वे यूरोपीय संघ की मजबूती की परीक्षा बता रहे हैं। ‘ये शत्रु सदियों से हमारे विभाजन का फायदा उठाते रहे हैं,’ उन्होंने चेताया।
जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टीनमीयर की तीखी आलोचना के ठीक बाद यह बयान आया, जिन्होंने अमेरिका द्वारा साझा मूल्यों के पतन पर चिंता जताई। फ्रांस में आगामी राष्ट्रपति चुनावों के मद्देनजर बैरोट ने यूरोपीय विरासत से मुंह मोड़ने वाली ताकतों की निंदा की।
ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में बदलाव के ये संकेत यूरोप को नई रणनीतिक स्वायत्तता की ओर ले जा रहे हैं, जहां हितों की रक्षा प्राथमिकता बनेगी।