
पेशावर। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। बन्नू जिले के गुलबदीन लुंडई इलाके में मंगलवार को अज्ञात हमलावरों ने जिरगा सदस्यों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिसमें चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। ये सदस्य स्थानीय विवाद सुलझाने वाली पारंपरिक पश्तून सभा से लौट रहे थे।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे ने इलाके को घेराबंदी में ले लिया। शवों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया और हमलावरों की तलाश में व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। स्थानीय लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
यह हमला एक दिन पहले टैंक जिले में पुलिस वाहन पर आईईडी धमाके के महज 24 घंटे बाद हुआ, जिसमें सात पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। मृतकों में गोमल बाजार थाने के एचएचओ इशाक अहमद खान, अतिरिक्त एसएचओ शेर असलम, चालक अब्दुल मजीद और एलीट फोर्स के जवान शामिल थे।
पिछले हफ्ते लक्की मरवत और बन्नू में गोलीबारी की अलग-अलग घटनाओं में चार पुलिसकर्मी मारे गए थे। पिछले नवंबर में भी बन्नू के होवेड में सात जिरगा सदस्यों की हत्या हुई थी। आईएसपीआर के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने बताया कि 2025 में 75,175 खुफिया अभियान चलाए गए, जिनमें ज्यादातर केपी और बलूचिस्तान में थे। उन्होंने इन हमलों के पीछे अफगान आतंकियों का हाथ बताया।
उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में चरमपंथी समूहों की सक्रियता बढ़ रही है, जो सुरक्षा चुनौतियों को और जटिल बना रही है।