
वॉशिंगटन, 25 जनवरी। फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो रविवार से चार दिवसीय चीन यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। इस बीच ह्यूमन राइट्स वॉच ने उनसे चीन में हो रही बर्बरताओं के खिलाफ मुखर होने की अपील की है। यूरोपीय देश आर्थिक हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच जंजीर में बंधे दिख रहे हैं।
एचआरडब्ल्यू के बयान में कहा गया कि यह यात्रा कूटनीति से कहीं आगे है। यह परखेगी कि क्या फिनलैंड अपनी मूल चिंताओं जैसे लोकतंत्र और मानवाधिकारों की हिफाजत कर पाएगा। आयरलैंड, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी व कनाडा के नेताओं ने हाल में व्यापार पर जोर दिया, अधिकारों को नजरअंदाज कर।
देश अमेरिका पर निर्भरता घटाने को चीन की ओर लपके हैं, मगर एचआरडब्ल्यू चेताता है कि तानाशाही से गठजोड़ यूरोप में बेचैनी बढ़ाएगा। फिनलैंड-चीन संयुक्त कार्ययोजना (2025-2029) इनोवेशन, हरित प्रौद्योगिकी व व्यापार पर केंद्रित है, अधिकारों का जिक्र धुंधला। यह चीन के दबाव को अनदेखा करता है।
चीन पर घर-बाहर सबसे खराब सलूक का आरोप। शिनजियांग में उइगरों पर हिरासत, निगरानी व जबरन श्रम। फिनलैंड के ऊर्जा-तकनीक क्षेत्रों को खतरा, भले ईयू का नियम 2027 तक आए। चीन का मॉडल श्रम अधिकारों को नीचता की दौड़ में धकेलता, नौकरियां छीनता।
हांगकांग में आलोचना पर जेल का भय, तिब्बत में सांस्कृतिक हमला। विदेशी कार्यकर्ताओं पर दमन। ओर्पो के पास साहसिक कदम उठाने का मौका, जो फिनलैंड को नैतिक ऊंचाई देगा।