
वाशिंगटन। पेंटागन के पूर्व प्रेस सचिव डेव लापन ने वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। सेवानिवृत्त मरीन कर्नल लापन का मानना है कि इस ऑपरेशन के कानूनी आधार, उद्देश्य और वैश्विक प्रभाव पर साफ स्पष्टीकरण का अभाव अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय साख को नुकसान पहुंचा रहा है।
एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में लापन ने कहा कि ऑपरेशन के कई दिन बाद भी मूल सवाल अनुत्तरित हैं। क्या यह ड्रग तस्कर की गिरफ्तारी था, तेल हथियाना था या सरकार उखाड़ फेंकने की साजिश? प्रशासन के परस्पर विरोधी बयान भ्रम पैदा कर रहे हैं।
उन्होंने अफगानिस्तान-इराक जैसे आधिकारिक युद्धों से तुलना की, जहां कांग्रेस की मंजूरी थी। वेनेजुएला में घातक बल इस्तेमाल हुआ, दर्जनों मरे, अमेरिकी सैनिक घायल हुए—बिना विधायी मंजूरी के।
सैन्य नजरिए से सफल तो था, लेकिन ‘कानून प्रवर्तन अभियान’ का दावा कमजोर है। संचार में भी खामियां: पारंपरिक पेंटागन ब्रीफिंग गायब, व्हाइट हाउस पर निर्भरता बढ़ी।
यह भ्रम मित्र राष्ट्रों में अविश्वास जगाता है। यूरोप-एशिया के साझेदार अब संधियों पर सवाल उठा रहे हैं। लापन बोले, ‘अमेरिका की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार। भरोसा अब संदिग्ध है—दुखद है।’
यह घटना अमेरिकी विदेश नीति की कमजोरियों को उजागर करती है, जहां आवेगी कदम वैश्विक अलगाव न्योता दे सकते हैं।
