
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक हवाई यात्रा को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। दुबई का व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तीसरे दिन भी बंद रहा, जबकि तीन दिनों में 3,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। अमेरिका और इजरायल की ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान, इराक, कुवैत, इजरायल, बहरीन, यूएई और कतर के हवाई क्षेत्र पूरी तरह बंद हो गए।
फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार शनिवार को 2,800, रविवार को 3,156 और सोमवार सुबह तक 1,239 उड़ानें रद्द हुईं। दुबई के अलावा अबू धाबी और दोहा के हवाई अड्डे भी या तो बंद रहे या सीमित सेवाओं के साथ चले। एमिरेट्स ने दुबई से सभी उड़ानें दोपहर 3 बजे तक निलंबित कर दीं, एतिहाद ने अबू धाबी के लिए दोपहर 2 बजे तक सेवाएं रोकीं और कतर एयरवेज ने हवाई क्षेत्र बंद होने से संचालन ठप कर दिया।
भारत पर भी असर पड़ा। एयर इंडिया ने दिल्ली, मुंबई और अमृतसर से यूरोप-अमेरिका की कई उड़ानें रद्द कीं। दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से रविवार को 100 फ्लाइट्स कैंसल हुईं, जिससे बाली से फ्रैंकफर्ट तक के यात्रियों के कनेक्शन बाधित हो गए।
ईरान के खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर हमले और लेबनान के बेरूत में हवाई हमलों ने संकट को और गहरा दिया। पायलट और क्रू फंसे होने से हवाई क्षेत्र खुलने पर भी तुरंत बहाली मुश्किल। विशेषज्ञों का मानना है कि अनिश्चितता लंबी चलेगी तो विमानन उद्योग को भारी आर्थिक नुकसान होगा। यह कोविड के बाद का सबसे बड़ा संकट है।