
बांग्लादेश की राजधानी ढाका तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इस विकास में कोई योजना या व्यवस्था नजर नहीं आ रही। पिछले कुछ दशकों में शहर का आकार और आबादी में भारी इजाफा हुआ है, फिर भी यह आधुनिक महानगर बनने से कोसों दूर है। शनिवार को जारी एक रिपोर्ट ने शहर की इन कमियों को बेनकाब किया है, जिसमें यातायात जाम, खराब बुनियादी सुविधाएं और प्रबंधन की कमी प्रमुख हैं।
प्रमुख बंगाली अखबार प्रথम आलो में प्रकाशित इस रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रैफिक लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को नर्क बना चुका है। आवास नीतियों में कोई स्पष्ट दिशा नहीं, बिजली-पानी-गैस जैसी सेवाएं घटिया गुणवत्ता वाली हैं। पार्कों और फुटपाथों की कमी, शोर-प्रदूषण का बोलबाला और प्रबंधन का पूर्ण पतन शहर को तबाह कर रहा है।
ढाका धीरे-धीरे झुग्गी शहर में तब्दील हो रहा है। अनियोजित बस्तियां चारों ओर फैल रही हैं, जो अतिक्रमण हटाओ अभियान और आग की घटनाओं से सुर्खियां बटोरती रहती हैं। शहरीकरण ने जनसंख्या संरचना बदल दी, लेकिन लोगों के रहन-सहन, कामकाज, सामाजिक संबंधों और नई बस्तियों के निर्माण पर ध्यान नहीं दिया गया।
बाल विवाह, कुपोषण, निम्न शिक्षा स्तर, बढ़ते अपराध और सीमित स्वास्थ्य सेवाएं चिंता बढ़ा रही हैं। जुलाई 2025 में इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट के ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स में ढाका 173 में से 171वें स्थान पर रहा।
वायु प्रदूषण में भी दुनिया के सबसे खराब शहरों में शुमार ढाका। जाम ने शहर की रफ्तार ठप कर दी है। अपर्याप्त ड्रेनेज से बाढ़ और कचरे के ढेर आम बात हैं। साल भर निर्माण से धूल का गुबार, गरीबी, असमानता, स्वास्थ्य दबाव और कमजोर शासन ने हालात बदतर कर दिए। रिपोर्ट ने सुधार की सख्त जरूरत बताई है।