
ओस्लो, 15 जनवरी। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के साथ गतिरोध कायम है। वॉशिंगटन में हाल ही में हुई कठिन वार्ताओं के बाद उन्होंने कहा कि अमेरिका की इस द्वीप को हासिल करने की लालसा बनी हुई है, भले ही डेनमार्क ने कड़ा विरोध जताया हो।
बुधवार की बैठक पर पहली टिप्पणी में फ्रेडरिक्सन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन और ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्जफेल्ट को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, ‘यह आसान बातचीत नहीं थी। दोनों मंत्रियों ने डेनमार्क साम्राज्य के पक्ष को मजबूती से रखा और अमेरिकी दावों का जवाब दिया। यह बेहद आवश्यक था।’
उन्होंने एक कार्य समूह बनाने की घोषणा की, लेकिन जोर देकर कहा कि मूल मतभेद अब भी बरकरार हैं। ‘अमेरिका की ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की इच्छा नहीं बदली। यह गंभीर मुद्दा है और हम इसे हकीकत बनने से रोकेंगे।’ फ्रेडरिक्सन ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा को नाटो की साझा जिम्मेदारी बताया।
यूरोपीय संघ और नाटो सहयोगी सक्रिय हो गए हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अतिरिक्त थल-वायु-समुद्री बल भेजने की घोषणा की। पहले ही फ्रांसीसी सैनिक रवाना हो चुके हैं। नीदरलैंड्स, जर्मनी, स्वीडन और नॉर्वे ने भी ग्रीनलैंड में टोही और सहयोग मिशनों में भाग लेने की पुष्टि की।
ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है, जहां रक्षा और विदेश नीति पर कोपेनहेगन का अधिकार है। ट्रंप के 2025 में सत्ता में लौटने के बाद उनके बयान आर्कटिक सुरक्षा को चुनौती दे रहे हैं। डेनमार्क और सहयोगी इस खतरे का मुकाबला करने को तैयार हैं।
