
नई दिल्ली में डेनमार्क के राजदूत रासमस अबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन ने भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों को मजबूत करने को एक स्वाभाविक विकल्प बताया है। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर निगाह के बीच यह बयान महत्वपूर्ण है।
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कराराते हुए कहा कि अमेरिका को इसे हासिल करने में नाटो की मदद मिलनी चाहिए। अन्यथा रूस या चीन इसे ले लेंगे। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने इसे खारिज किया है और भारत जैसे सहयोगियों से समर्थन मांगा है।
राजदूत ने विशेष साक्षात्कार में 2020 की ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘यह भारत की पहली स्पष्ट लेबल वाली रणनीतिक साझेदारी थी, जो स्थिरता और हरित ऊर्जा पर केंद्रित है। अगले पांच वर्षों के लिए नया संयुक्त एक्शन प्लान तैयार हो रहा है।’
उन्होंने आर्थिक पूरकता पर जोर दिया। ‘भारत और यूरोप व्यापार व अर्थव्यवस्था में एक-दूसरे के पूरक हैं। बदलती दुनिया में निकटता से दोनों को लाभ होगा।’ डेनमार्क की ईयू अध्यक्षता में समझौते को अंतिम रूप देने के प्रयास तेज हैं।
ट्रंप के बयानों ने विवाद को हवा दी है। डेनमार्क भारत के साथ ग्रीन एनर्जी और स्थिरता पर फोकस बढ़ा रहा है। यह साझेदारी न केवल भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना करेगी बल्कि सतत विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।