
दक्षिण चीन सागर में चीन द्वारा विकसित ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किल जोन’ ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चिंता की लहरें पैदा कर दी हैं। यह कदम चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की आक्रामक रणनीति को उजागर करता है, जो सैन्य तकनीक के जरिए क्षेत्रीय प्रभुत्व हासिल करने पर तुला है।
रिपोर्ट के अनुसार, फिएरी क्रॉस, मिसचीफ और सुबी रीफ्स पर कृत्रिम द्वीपों को इलेक्ट्रॉनिक युद्ध का केंद्र बना दिया गया है। यहां मोनोपोल एंटीना, मोबाइल जॅमर वाहन और मजबूत सैन्य सुविधाएं तैनात हैं। ये उपकरण पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम पर कब्जा दिलाते हैं, जिससे संचार बाधित हो जाता है, रडार जॅम हो जाते हैं और विरोधी सेनाएं अंधी हो जाती हैं।
2023 से 2025 तक भारी निवेश इस रणनीति का हिस्सा है, जो अमेरिकी विमानवाहक समूहों की ताकत को कमजोर करने पर केंद्रित है। जहाज-आधारित ‘किल वेब्स’ के साथ एकीकृत यह प्रणाली अमेरिकी नेटवर्क युद्ध क्षमताओं को पंगु बना सकती है।
यह केवल हथियारों का खेल नहीं, बल्कि शक्ति की व्यापक सोच है। चीन समुद्री नियंत्रण जितना ही इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रभुत्व को महत्वपूर्ण मानता है। क्षेत्रीय अस्थिरता से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय सतर्कता जरूरी है।