
बीजिंग ने अमेरिका के ईरान के प्रति आक्रामक रुख की कड़ी निंदा की है। चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से इसे अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया गया है। साथ ही, ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने के प्रस्ताव को भी गलत ठहराया गया।
मंगलवार को नियमित प्रेस वार्ता में प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन किसी भी देश के आंतरिक मामलों में दखल और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल प्रयोग या धमकी का विरोध करता है। उन्होंने मध्य पूर्व में शांति के लिए सभी पक्षों से अधिक योगदान की अपेक्षा जताई। यह बयान अमेरिका द्वारा अपने नागरिकों को ईरान तत्काल छोड़ने के निर्देश के संदर्भ में आया, जहां व्हाइट हाउस ने सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर विचार का संकेत दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साइबर और मनोवैज्ञानिक युद्ध जैसे अन्य उपाय भी विचाराधीन हैं। माओ ने ईरान को राष्ट्रीय स्थिरता बनाए रखने में समर्थन का भरोसा दिलाया। दूसरी तरफ, वाशिंगटन में चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया एक्स पर 25% टैरिफ की आलोचना की। इसे गैरकानूनी एकतरफा प्रतिबंध और जबरन क्षेत्राधिकार का प्रयास कहा।
दूतावास प्रवक्ता ने लिखा, ‘टैरिफ युद्ध में कोई विजेता नहीं होता। दबाव से समस्याएं हल नहीं होतीं। चीन गैरकानूनी प्रतिबंधों का डटकर मुकाबला करेगा।’ मामला डोनाल्ड ट्रंप के ट्रुथ सोशल पोस्ट से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ व्यापार करने वालों पर अमेरिकी व्यापार पर 25% टैरिफ का ऐलान किया। भारत पर पहले से 50% टैरिफ लगा है।
यह कदम वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकता है, खासकर ऊर्जा क्षेत्र में। चीन का रुख बहुपक्षीयता और संवाद पर जोर देता है, जो अमेरिकी एकतरफावाद के खिलाफ खड़ा दिखता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है।