
बीजिंग ने ईरान के मुद्दे पर अमेरिका के आक्रामक रुख की कड़ी निंदा की है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को प्रेस वार्ता में कहा कि चीन दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल प्रयोग या धमकी का विरोध करता है। उन्होंने मध्य पूर्व में शांति के लिए सभी पक्षों से अधिक योगदान की अपेक्षा जताई।
अमेरिका द्वारा अपने नागरिकों को ईरान तत्काल छोड़ने के निर्देश और सैन्य विकल्पों पर विचार की खबरों पर बोलते हुए माओ ने ईरान को राष्ट्रीय स्थिरता बनाए रखने में समर्थन का भरोसा दिलाया। अमेरिकी मीडिया में साइबर और मनोवैज्ञानिक युद्ध की चर्चा भी सामने आई है।
दूसरी तरफ, वाशिंगटन में चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया पर 25 प्रतिशत टैरिफ के प्रस्ताव की आलोचना की। डोनाल्ड ट्रंप के ट्रुथ सोशल पोस्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर यह टैरिफ लगेगा। भारत पर तो पहले से 50 प्रतिशत टैरिफ है।
दूतावास ने लिखा, ‘टैरिफ युद्ध में कोई विजेता नहीं। जबरदस्ती से समस्याएं हल नहीं होतीं। चीन अवैध एकतरफा प्रतिबंधों और लॉन्ग-आर्म ज्यूरिस्डिक्शन का विरोध करता है तथा अपने हितों की रक्षा के लिए सभी कदम उठाएगा।’
ट्रंप का यह ऐलान वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकता है। चीन का यह रुख अमेरिका के साथ उसके मतभेदों को उजागर करता है, खासकर ऊर्जा और व्यापार क्षेत्र में। मध्य पूर्व की अस्थिरता के बीच बीजिंग संवाद की वकालत कर रहा है।