
गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में नरमी आई है और सीमा पर सेवाएं धीरे-धीरे बहाल हो रही हैं। इसी बीच, भारत में चीनी राजदूत जू फीहोंग ने एक्स प्लेटफॉर्म पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 9 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित पहली ब्रिक्स शेरपा बैठक में चीन के उपविदेश मंत्री मा झाओक्सू ने हिस्सा लिया।
मा झाओक्सू ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ब्रिक्स सहयोग के उच्च गुणवत्ता वाले विकास के कॉन्सेप्ट का जिक्र किया। इसमें शांति, नवाचार, हरित विकास, न्याय और जन-जन संपर्क को मजबूत करने वाले पांच सहयोग ढांचे शामिल हैं। ये ब्रिक्स तंत्र के भविष्य की दिशा निर्धारित करते हैं।
राजदूत ने कहा कि इस वर्ष ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में चीन भारत, अन्य सदस्यों और साझेदार देशों संग सही दिशा अपनाने, व्यावहारिक सहयोग गहराने, कार्यप्रणाली सुधारने, बहुपक्षीय सहयोग मजबूत करने, वैश्विक न्याय बनाए रखने और ब्रिक्स को नई ऊंचाइयों तक ले जाने को तैयार है।
बैठक में सभी पक्षों ने ब्रिक्स प्राथमिकताओं और प्रमुख आयोजनों पर विचार रखे तथा 18वीं ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियां शुरू कर दीं।
इधर, 7 से 9 फरवरी तक चीनी अंतरराष्ट्रीय व्यापार संवर्धन परिषद (सीसीपीआईटी) के नेतृत्व में जकार्ता में 2026 एपेक व्यापार सलाहकार परिषद की पहली बैठक हुई। यह एपेक ‘चीन वर्ष’ का प्रमुख व्यावसायिक कार्यक्रम था। इंडोनेशिया के आर्थिक समन्वय मंत्री एयरलंगा हार्टार्टी ने व्यापार समुदाय की भूमिका की सराहना की और शेन्जेन में 2026 एपेक शिखर सम्मेलन में भागीदारी की उम्मीद जताई।