
नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान अफगानिस्तान व बांग्लादेश के साथ संबंधों को मजबूत कर भारत के प्रभाव को कम करने की रणनीति पर चल रहे हैं। बीजिंग में 3 से 5 जनवरी तक चली सातवीं रणनीतिक संवाद वार्ता में विदेश मंत्री वांग यी व मोहम्मद इशाक डार ने संयुक्त बयान जारी कर त्रिपक्षीय व चतुर्भुज तंत्रों के जरिए सहयोग बढ़ाने का ऐलान किया।
चीन अफगान मामलों में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, पुनर्निर्माण व आतंकवाद विरोधी साझेदारी पर जोर दे रहा है। बयान में अफगानिस्तान में सक्रिय सभी आतंकी गुटों के खिलाफ ठोस कदम व अफगान सरजमीं के दुरुपयोग रोकने की मांग की गई। काबुल इनकार करता है तथा पाकिस्तानी हमलों को आंतरिक समस्या बताता है।
आर्थिक मोर्चे पर सीपीईसी 2.0 को मंजूरी मिली, जो बीआरआई का हिस्सा है। तीसरे पक्ष की भागीदारी का स्वागत है, बशर्ते शर्तें मान ली जाएं। अफगानिस्तान तक विस्तार की योजना से काबुल को भारत के विकल्प मिल सकते हैं। पाकिस्तान में कर्ज व व्यवहार्यता के सवाल बने हुए हैं।
तुर्की, कतर व ईरान की मध्यस्थता के बाद चीन का सक्रिय होना क्षेत्रीय समीकरण बदल सकता है। यह संवाद भारत को घेराबंदी की चुनौती देता है।