
ताइपे में बढ़ते तनाव के बीच ग्लोबल ताइवान इंस्टीट्यूट ने चेतावनी दी है कि चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ताइवान के आसपास आक्रामक और बड़े स्तर के अभियान चला सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 तक चीन ताइवान पर कब्जे की पूरी क्षमता हासिल कर लेगा, जो क्रॉस-स्ट्रेट संबंधों में निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
जीटीआई के डायरेक्टर जॉन डॉटसन ने बताया कि अप्रैल और दिसंबर में पीएलए के अभ्यास ताइवान के दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में हुए, जहां चीनी कोस्ट गार्ड का आक्रामक उपयोग किया गया। यह रणनीति चीन को सैन्य घुसपैठ को कानूनी गश्त के रूप में पेश करने की अनुमति देती है।
सीनियर फेलो एन कोवालेवस्की ने कहा कि 2026 पीएलए के लिए इस क्षमता प्राप्त करने का अंतिम वर्ष है। वॉशिंगटन में आयोजित पैनल चर्चा में 2025 में चीन के बढ़ते दबाव पर जोर दिया गया, जिसमें ‘जस्टिस मिशन 2025’ शामिल है। उन्होंने चेताया कि इस साल चीन की सैन्य ताकत में भारी उछाल आ सकता है।
ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई की नीतियों या अमेरिकी हथियार बिक्री को बहाना बनाकर चीन अभ्यास करता है, लेकिन ये पहले से योजनाबद्ध होते हैं। ताइवान के नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो ने सीसीपी पर साइबर हमले, 19,000 से अधिक विवादास्पद संदेश और लाखों हैकिंग के आरोप लगाए।
लेजिस्लेटिव युआन को दी रिपोर्ट में 799 संदिग्ध ऑनलाइन अकाउंट्स का जिक्र है, जो अमेरिका, लाई और ताइवान की रक्षा क्षमता पर शक पैदा कर रहे हैं। यह चीन की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो बिना युद्ध के दबाव बनाए रखती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सतर्क रहने की जरूरत है।