
ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जहां चीन ने ‘जस्टिस मिशन 2025’ नामक अपने अब तक के सबसे बड़े सैन्य अभ्यास पूरे किए। ये अभ्यास 29 से 31 दिसंबर तक चले, जिसमें चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की सेना, नौसेना, वायुसेना और रॉकेट बलों ने समन्वित कार्रवाई की। अभ्यास में ताइवान की घेराबंदी, प्रमुख बंदरगाहों को सील करना, सटीक हमले और आपूर्ति मार्गों को बाधित करने जैसे युद्धक दृश्यों का अनुकरण किया गया।
अमेरिका ने इन सैन्य गतिविधियों पर गहरी चिंता जताई है। वाशिंगटन का मानना है कि बीजिंग की ये कार्रवाइयां और बयानबाजी क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल रही हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ उप प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि चीन को सैन्य दबाव छोड़कर बातचीत का मार्ग अपनाना चाहिए। उन्होंने अपील की कि बीजिंग संयम बरते, ताइवान पर दबाव समाप्त करे और सार्थक संवाद शुरू करे।
ताइवान ने इस दौरान 77 चीनी सैन्य विमानों और 17 नौसैनिक जहाजों की गतिविधियां रिकॉर्ड कीं। जवाब में ताइवान ने लड़ाकू विमान तैनात किए, सुरक्षा उपाय सख्त किए और नदियों के मुहानों पर विस्फोटक बैरल जैसे अवरोध लगाए। अमेरिका के सहयोगी देश जैसे यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी ताइवान स्ट्रेट में बढ़ते सैन्य दबाव पर असहजता जताई, क्योंकि इससे गलतफहमी और टकराव का जोखिम बढ़ जाता है।
चीन ने इन अभ्यासों को ताइवान के अलगाववादियों के खिलाफ चेतावनी करार दिया। बीजिंग का कहना है कि ये गतिविधियां अमेरिका-ताइवान रक्षा सहयोग और हालिया हथियार सौदे का जवाब हैं। वहीं अमेरिका ने स्पष्ट किया कि वह ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता का समर्थन करता है तथा किसी भी बल प्रयोग या दबाव से यथास्थिति बदलने का विरोध करता है। यह मुद्दा वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ा है।
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने नए साल के संदेश में ताइवान एकीकरण का लक्ष्य दोहराया, जबकि ताइवान सरकार ने बीजिंग के दावों को खारिज करते हुए कहा कि द्वीप का भविष्य उसके 23 मिलियन लोगों द्वारा तय होगा। 1949 से ताइवान मुख्यभूमि चीन से अलग शासित है, अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था, सेना और अर्थव्यवस्था के साथ। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की ये रणनीति समुद्री क्षेत्रों में दबाव बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है। अमेरिका लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत शांतिपूर्ण समाधान और समुद्री-हवाई स्वतंत्रता पर जोर देता रहा है।