
भारत और कनाडा के बीच संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की उम्मीद है कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के प्रस्तावित भारत प्रवास से। भले ही दोनों देश नजदीक न हों और कोई सैन्य गठजोड़ न हो, लेकिन आर्थिक तालमेल और वैश्विक मंचों पर साझा चिंताएं इन्हें मजबूत बनाए रखती हैं। एक विश्लेषण में कहा गया है कि यह यात्रा राजनीतिक उतार-चढ़ाव से ऊपर उठकर निवेश, ऊर्जा और व्यापार पर केंद्रित चरण की शुरुआत कर सकती है।
पूर्व राजनयिक संजय कुमार वर्मा के अनुसार, आने वाले वर्षों में संबंध व्यापार ढांचे, पूंजी प्रवाह, सप्लाई चेन और जनसंपर्क पर जोर देंगे। दौरे में व्यापक आर्थिक साझेदारी के लिए संदर्भ शर्तों को अंतिम रूप देना प्रमुख रहेगा। कनाडा में भारतीय दवाओं, डिजिटल सेवाओं, इंजीनियरिंग और पेट्रोलियम उत्पादों के लिए रास्ते आसान होंगे।
बदले में भारत कनाडा के ऊर्जा, पोटाश, दालें, लकड़ी और कृषि तकनीक को अपनाएगा। कनाडाई निवेश पहले से भारतीय इंफ्रा और नवीकरणीय ऊर्जा में अग्रणी है। व्यवस्थित ढांचे से व्यापार दोगुना हो सकता है यदि बाधाएं कम हों।
ऊर्जा सहयोग में हाइड्रोकार्बन, यूरेनियम और स्वच्छ ऊर्जा पर बात होगी। कृषि, विनिर्माण, खनिज, एयरोस्पेस, डिजिटल और हरित तकनीक क्षेत्र मजबूत होंगे। सुरक्षा में आतंकवाद, खालिस्तान और अपराध पर संयुक्त कदम।
संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर सुधार और सहयोग दोहराएंगे। यह दौरा संबंधों को व्यवस्थित और दीर्घकालिक बनाएगा।