
अमेरिका की वेनेजुएला के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर दुनिया भर में बहस छिड़ी हुई है। पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने इस ऑपरेशन को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप बताया। उन्होंने कहा कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के बाद असली विपक्ष को समर्थन दिया गया, जो 2018 की घटना की याद दिलाता है जब जुआन गुएडो को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया था।
बोल्टन ने रूस-यूक्रेन या चीन-ताइवान जैसे मामलों से तुलना को सिरे से खारिज किया। समस्या यह है कि ट्रंप ने मादुरो तो हटा दिया, लेकिन तानाशाही की जड़ें बरकरार हैं। ट्रंप के हालिया बयानों से लगता है कि वे पूरे सिस्टम से निपटने को तैयार हैं।
पूर्व एनएसए ने स्वीकार किया कि ट्रंप वेनेजुएला के तेल संसाधनों तक पहुंच को लेकर बेहद चिंतित थे। उनका फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा से ज्यादा व्यापारिक लगता है। अभी शुरुआती चरण है, इसलिए अन्य जगहों पर उनके इरादों का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।
ट्रंप का दावा कि अमेरिकी तेल कंपनियां अब वहां डेरा डालेंगी, बोल्टन ने अवास्तविक बताया। चावेज-मादुरो के 30 सालों ने तेल बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया है। पंप, पाइपलाइन और लोडिंग सुविधाएं जर्जर हैं। निर्यात बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर और वर्षों का निवेश जरूरी है।
राजनीतिक अस्थिरता के बीच विदेशी कंपनियां बड़ा निवेश करने से हिचकेंगी। नोबेल शांति पुरस्कार पर बोल्टन ने हंसते हुए कहा, ‘ट्रंप खुद ही जल्द बता देंगे कि मादुरो हटाने पर उन्हें पुरस्कार मिलना चाहिए, लेकिन संभावना कम है।’ यह बयान अमेरिकी विदेश नीति की जटिलताओं को उजागर करता है।