
नई दिल्ली। बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के करीब डेढ़ साल बाद गुरुवार को हुए संसदीय चुनावों के शुक्रवार घोषित नतीजों में बीएनपी गठबंधन ने 200 से अधिक सीटें जीत लीं। इससे बीएनपी बहुमत की सरकार बनाने जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि इस बदलाव से भारत और दक्षिण एशिया पर क्या असर पड़ेगा।
यूनुस की अंतरिम सरकार में भारत-बांग्लादेश संबंध खराब हो गए थे। पाकिस्तान की घुसपैठ बढ़ी, आईएसआई ने युवाओं को भारत विरोधी प्रशिक्षण देना शुरू किया। बीएनपी के सत्ता में आने से संबंध सुधारने की कोशिश होगी। सीमा, घुसपैठ और तीस्ता जल विवाद फिर उभर सकते हैं।
खालिदा जिया के समय संबंध खराब थे, लेकिन तारिक रहमान के नेतृत्व में सुधार संभव। चीन चटगांव बंदरगाह पर निगाहें गड़ाए है। यूनुस काल में बंदरगाह चीन को सौंपने की बात चली थी, जो भारत के लिए खतरा था। बीएनपी चीन से निवेश बढ़ा सकता है, जिससे हिंद महासागर में तनाव बढ़ेगा।
पाकिस्तान से संबंध ढीले पड़ सकते हैं। भारत के पूर्वोत्तर में सतर्कता बरतनी होगी। सार्क को नई जान मिल सकती है। व्यापार प्रभावित हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञ सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। जमात की वापसी न होने से राहत।