
ढाका में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से पहले बांग्लादेश की सियासत गरमाती जा रही है। मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने कट्टर इस्लामी जमात-ए-इस्लामी पर मतदाताओं को गुमराह करने के लिए फासीवादी प्रोपेगेंडा फैलाने का गंभीर आरोप लगाया है।
बुधवार को ढाका में आयोजित प्रेस वार्ता में बीएनपी के चुनाव समिति प्रवक्ता और चेयरपर्सन के सलाहकार महदी अमीन ने जमात की उस कोशिशों की कड़ी निंदा की, जिसमें वे बीएनपी को भ्रष्टाचार का ‘विश्व चैंपियन’ बताकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इसे साफ राजनीतिक पाखंड करार दिया।
अमीन ने याद दिलाया कि 2001-2006 के बीएनपी शासनकाल में जब जमात को मंत्रिमंडल और संसद में जगह मिली थी, तब उन्होंने भ्रष्टाचार पर चूं तक नहीं की। ढाका ट्रिब्यून के हवाले से उन्होंने कहा, ‘अब चुनावी रिंग में वही पुराना फासीवादी तिकड़म चला रहे हैं, जो खुला राजनीतिक ढोंग है।’
बीएनपी नेता ने आरोप लगाया कि जमात धार्मिक भावनाओं का शोषण कर वोटरों को जन्नत का लालच, कुरान की शपथ और पैसे देकर लुभा रही है। जिन पर वोट खरीदने के इल्जाम हैं, वे भ्रष्टाचार पर लेक्चर देने लायक नहीं।
इस तरह की कारगुजारियां चुनावी नियमों का उल्लंघन हैं और लोकतंत्र को कमजोर करती हैं। अमीन ने चुनाव आयोग से गलत अफवाहें फैलाने और फासीवादी राजनीति को बढ़ावा देने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
बीएनपी ने जमात के कैंपेन का खुलासा करने का वादा किया है। इस हफ्ते ठाकुरगांव में बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बीडी हाई स्कूल ग्राउंड पर रैली में जमात को अप्रत्यक्ष चेतावनी दी। ठाकुरगांव-1 से उम्मीदवार फखरुल ने द डेली स्टार के अनुसार कहा, ‘जिन्होंने 1971 के मुक्ति संग्राम में अंतिम सांस तक पाकिस्तानी सेना का साथ दिया, वे आज सत्ता के लिए वोट मांग रहे हैं। उन्हें वोट देकर देश को तबाह न करें।’
‘हमारी पहचान 1971 से है। पाकिस्तान के शोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ी और आजादी हासिल की। उस भावना को बचाएं।’ बढ़ते विवादों के बीच चुनावी जंग और तीखी होती जा रही है।