
वॉशिंगटन। इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने दावा किया है कि ईरान पर इजरायल के सैन्य हमले धीरे-धीरे वहां के शासन की जड़ें हिला रहे हैं। फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) लगातार हमलों से बुरी तरह प्रभावित हो चुका है, जिससे ईरानी अवाम को अपना भाग्य खुद तय करने का मौका मिल सकता है।
बेनेट ने अभियान की रणनीति पर विस्तार से बताया। पहले चरण में शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया। ‘वायु रक्षा व्यवस्था कमजोर होने के बाद अब पूरे सुरक्षा तंत्र को ध्वस्त करने की बारी है,’ उन्होंने कहा। कमांड सेंटरों पर प्रहार से पूरा तंत्र लड़खड़ा गया है। ईरानी जनता पर पड़ी दमन की बेड़ियां ढीली पड़ रही हैं, हालांकि अंतिम आजादी उनके हाथ में है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल का लक्ष्य सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्मरक्षा है। ‘हमने लंबे समय से मंडरा रहे खतरे को समाप्त किया,’ बेनेट ने जोर दिया। अगर कार्रवाई न होती तो ईरान के पास हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें, आईसीबीएम और न्यूक्लियर हथियार होते, जो इजरायल, यूरोप व अमेरिका को भेद सकते।
आईआरजीसी अब पहले जैसी ताकतवर नहीं। ‘कमांडर हटाए गए, नेतृत्व का बड़ा हिस्सा नष्ट,’ उन्होंने कहा। ईरान में विद्रोह की संभावना अनिश्चित है—कुछ दिनों या महीनों में हो सकता है या न भी। सोवियत संघ के पतन से तुलना करते हुए बेनेट ने कहा कि वहां भी भ्रष्टाचार व जनता से दूरी ने अंत लाया।
इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम व प्रॉक्सी गुटों को खतरा मानता आया है। ये बयान मध्य पूर्व में बदलाव की आहट बता रहे हैं।