
ढाका के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले नौ हजार से ज्यादा भारतीय छात्रों के लिए अब हर दिन खतरे से भरा है। राजनीतिक हलचल और भारत-विरोधी माहौल ने इस देश को असुरक्षित बना दिया है, जो कभी सस्ते और सुरक्षित शिक्षा का केंद्र था।
भारत के महंगे कोर्सेज के मुकाबले कम खर्च ने बांग्लादेश को पसंदीदा बनाया। लेकिन अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन और शेख हसीना के पतन के बाद सब बदल गया। दिसंबर में एक भारतीय छात्र पर हमला, सीसीटीवी में कैद, ने कैंपस में दहशत फैला दी। छात्र खुद को कैदखाने में कैदी जैसा महसूस करते हैं—धीमी आवाज, सतर्क नजरें।
राजनीतिक विश्लेषक एम.ए. हुसैन कहते हैं कि चुनाव नजदीक हैं, हिंसा बढ़ रही है। यूनुस सरकार अपराध पर नियंत्रण का दावा करती है, लेकिन छात्रों का मन नहीं मानता। हिंदू छात्रों पर खतरा ज्यादा, अल्पसंख्यक हमलों की खबरें आम। सरकार इन्हें राजनीतिक बताती है, पर छात्रों को फर्क नहीं पड़ता।
ये छात्र न सिर्फ फीस देते हैं, बल्कि两国 के रिश्तों को मजबूत करते हैं। डिग्रियां लटक रही हैं, भविष्य धुंधला। शिक्षा को राजनीति से अलग रखना चाहिए, लेकिन बांग्लादेश में वो जंजीर टूट रही है। भारत से सलाह आ रही है—वापसी करो, पर फैसला मुश्किल।