
ढाका। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) में हड़कंप मच गया है। एक अभियोजक बीएम सुल्तान महमूद ने पूर्व मुख्य अभियोजक मोहम्मद ताजुल इस्लाम और उनके सहयोगी गाजी मोनावर हुसैन तमीम पर भ्रष्टाचार और गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। सुल्तान का कहना है कि ताजुल के नेतृत्व में एक गिरोह ने चीफ प्रॉसिक्यूटर पद को कमाई का साधन बना लिया था।
जुलाई 2024 के प्रदर्शनों से जुड़े एक मामले में आरोपी अब्जल की पत्नी तमीम के कमरे में गई थी। सुल्तान ने इसकी सूचना दी, लेकिन कोई कार्रवाई न हुई और उन्हें ही फटकार लगाई गई। बाद में तमीम ने कई लोगों के सामने यह कबूल लिया। सुल्तान ने कई केसों में सरकारी गवाहों के चयन और आरोपी बनाने में अनियमितताओं का खुलासा किया। उनके पास वीडियो सबूत भी हैं।
चंखरपुल घटना में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने वाले सब-इंस्पेक्टर अशरफुल का वीडियो मौजूद है, फिर भी उन्हें गवाह बना दिया गया। रंगपुर के अबू सईद हत्याकांड में सहायक पुलिस आयुक्त अल इमरान हुसैन को हटा दिया गया, जबकि गवाहों ने उन्हें दोषी ठहराया। पूर्व आईजीपी चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को बिना वजह गवाह बनाया गया।
ताजुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आरोपों को निजी दुश्मनी बताकर खारिज किया। सोमवार को अमीनुल इस्लाम ने आईसीटी का चार्ज संभाल लिया। शेख हसीना सरकार गिरने के बाद यूनुस सरकार ने ताजुल को नियुक्त किया था, लेकिन उनके कार्यकाल में कई विवाद हुए। ये आरोप ट्रिब्यूनल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।