
नई दिल्ली से मिल रही खुफिया रिपोर्ट्स बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों पर गंभीर चिंता जता रही हैं। आगामी चुनावों के मद्देनजर यह हिंसा अब बेतरतीब नहीं, बल्कि सुनियोजित अभियान का रूप ले चुकी है।
ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज़ की रिपोर्ट बताती है कि जून 2025 से जनवरी 2026 तक 116 अल्पसंख्यकों की निर्मम हत्या हुई। यह हिंसा अब देश के सभी आठ डिवीजनों और 45 जिलों में फैल चुकी है, जो संगठित साजिश की ओर इशारा करती है।
भारतीय खुफिया अधिकारी मानते हैं कि शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद मोहम्मद यूनुस प्रशासन में आईएसआई-जमात गठजोड़ को खुली छूट मिली है। पहले हिंसा पर सरकारी नियंत्रण होता था, लेकिन अब अपराधी ‘काम पूरा होने तक न रुकने’ के मूड में हैं।
यह न केवल बांग्लादेश को अल्पसंख्यक-रहित बनाने की साजिश है, बल्कि भारत को उकसाने का प्रयास भी। अल्पसंख्यक आबादी 1946 में 30% से घटकर 2020 तक 9% रह गई, जो व्यवस्थित भेदभाव को दर्शाता है।
चुनाव नजदीक आते ही ऐसी घटनाओं में इजाफा 예상 है, क्योंकि कट्टरपंथी वोट बैंक मजबूत करना चाहते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है ताकि मानवीय संकट रोका जा सके।