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बांग्लादेश: जमात प्रमुख का यू-टर्न, महिलाओं पर टिप्पणी से अब सुरक्षा का वचन

ढाका। महिलाओं के खिलाफ विवादित टिप्पणियों से घिरे जमात-ए-इस्लामी के नेता शफीकुर रहमान ने अपना रुख पूरी तरह बदल लिया है। पहले कामकाजी महिलाओं को नैतिक पतन का कारण ठहराने वाले रहमान अब दावा कर रहे हैं...

Lok Shakti
Lok Shaktiसंवाददाता (Reporter)
|विदेश|
February 4, 2026
बांग्लादेश: जमात प्रमुख का यू-टर्न, महिलाओं पर टिप्पणी से अब सुरक्षा का वचन
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ढाका। महिलाओं के खिलाफ विवादित टिप्पणियों से घिरे जमात-ए-इस्लामी के नेता शफीकुर रहमान ने अपना रुख पूरी तरह बदल लिया है। पहले कामकाजी महिलाओं को नैतिक पतन का कारण ठहराने वाले रहमान अब दावा कर रहे हैं कि सत्ता में आने पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

शनिवार शाम उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने हंगामा मचा दिया था, जिसमें उन्होंने महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी पर अभद्र टिप्पणियां कीं। राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने इनकी कड़ी निंदा की, इसे महिलाओं के अधिकारों पर हमला बताया।

कुरीग्राम जिले की एक चुनावी सभा में रहमान ने महिला वोटरों को आश्वस्त किया। द डेली स्टार के अनुसार, उन्होंने कहा, 'हम आपके घरों, सड़कों, कार्यस्थलों पर 100 प्रतिशत सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करेंगे। जिस देश में मांएं असुरक्षित हों, वह मेरा देश नहीं। हम अपनी मांओं, बहनों और बेटियों की रक्षा करेंगे। डरना मत, आंखों में आंखें डालकर लड़ते रहो।'

रहमान ने बीएनपी पर भी निशाना साधा, आरोप लगाया कि उनके अकाउंट को हैक कर बदनाम करने की साजिश रची गई। बीएनपी चीफ तारिक रहमान ने भी पलटवार किया था। बोनिक बार्ता के मुताबिक, उन्होंने कहा, 'महिलाओं का अपमान करने वाले, उन्हें घरों में कैद करने वाले लोग देशभक्त नहीं। अपनी बहनों का सम्मान न करने वाले देश की सुरक्षा नहीं कर सकते।'

जमात की महिला विंग की महासचिव नूरुन्निसा सिद्दिका के पुराने बयानों ने विवाद को हवा दी, जिन्होंने कहा था कि इस्लामी सिद्धांतों के तहत महिलाएं शीर्ष पदों पर नहीं आ सकतीं। उन्होंने कुरान का हवाला देते हुए पुरुषों को संरक्षक बताया।

चुनाव नजदीक आते ही यह विवाद जमात की महिला वोटरों पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश को उजागर करता है। क्या यह सच्ची बदलाव की शुरुआत है या राजनीतिक चाल? बांग्लादेश की राजनीति में महिलाओं की भूमिका पर बहस तेज हो गई है।

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