
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों ने अंतरिम सरकार की नाकामी को साफ तौर पर सामने ला दिया है। नई रिपोर्ट बताती है कि जब भी केंद्र की सत्ता कमजोर पड़ती है, हिंदू व्यापारियों पर हिंसा चरम पर पहुंच जाती है। ये लोग आर्थिक रूप से मजबूत हैं, लेकिन राजनीतिक रसूख के अभाव में आसानी से शिकार बन जाते हैं।
नरसिंदी में किराना दुकान चलाने वाले मणि चक्रवर्ती की हत्या इसी का ताजा उदाहरण है। भरी बाजार में उनकी चाकू मारकर हत्या कर दी गई—पिछले 18 दिनों में छठी ऐसी वारदात। भीड़भाड़ के बावजूद अपराधी फरार हैं, जो जांच तंत्र की लाचारी दर्शाता है।
शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद केंद्रीकृत व्यवस्था चरमरा गई। उनके शासन में सत्तावादी होने के बावजूद सुरक्षा बल सांप्रदायिक हिंसा पर तुरंत कार्रवाई करते थे। अब मोहम्मद यूनुस की सरकार को बिखरा हुआ तंत्र मिला है, जहां पुलिस को स्पष्ट निर्देशों का अभाव है।
जिलों में थाने सुस्ती से काम कर रहे हैं, क्योंकि असली सत्ता किसके पास है, यह स्पष्ट नहीं। नतीजा—अपराधी बेखौफ हैं। यह सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि राज्य की सुरक्षा विफलता का प्रमाण है।
बांग्लादेश ने पहले भी राजनीतिक तूफान झेले हैं, लेकिन वर्तमान संकट संस्थागत कमजोरी और सांप्रदायिक आग को एक साथ जोड़ता है। मणि की हत्या चेतावनी है—सरकार को तुरंत कमान संभालनी होगी वरना हालात बेकाबू हो जाएंगे।