
ढाका में मंगलवार को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनकी कैबिनेट में 25 मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों को शामिल किया गया। लेकिन इस शपथग्रहण के ठीक बीचोंबीच हालिया जनमत संग्रह की वैधता पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील मोहम्मद अताउल मजीद ने हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है, जिसमें 12 फरवरी को हुए जनमत संग्रह को असंवैधानिक बताते हुए इसके नतीजों को रद्द करने की मांग की गई है।
याचिका को पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन के रूप में पेश किया गया। इसमें कहा गया कि बांग्लादेश का संविधान जनमत संग्रह की अनुमति ही नहीं देता। निर्वाचन आयोग के पास भी ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई कि संबंधित अधिकारियों से पूछा जाए कि इसे गैरकानूनी क्यों न घोषित किया जाए।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त, कैबिनेट सचिव और कानून मंत्रालय के सचिव को पक्षकार बनाया गया है। अगले सप्ताह जस्टिस फातिमा नजीब की बेंच इसकी सुनवाई कर सकती है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों में 60 प्रतिशत से ज्यादा मतदाताओं ने बदलावों के पक्ष में वोट डाला। कुल 4.80 करोड़ ने हां कहा, जबकि 2.25 करोड़ ने ना।
इधर, जमात-ए-इस्लामी के नवनिर्वाचित सांसदों ने बीएनपी के संविधान सुधार परिषद में शामिल होने से इंकार कर शपथ लेने से मना कर दिया। बीएनपी सांसदों को जातीय संसद भवन में शपथ दिलाई गई। यह विवाद बांग्लादेश की राजनीति में नए संकट के संकेत दे रहा है, जहां संवैधानिक प्रावधानों की कसौटी पर लोकतंत्र परखा जा रहा है।