
ढाका में गुरुवार को 13वें संसदीय चुनाव का रंगमंच सजा, जहां उत्साह और हिंसा का अनोखा संगम देखने को मिला। 299 सीटों पर 42,659 पोलिंग बूथों पर सुबह साढ़े सात से शाम साढ़े चार तक वोटिंग चली। कड़े सुरक्षा घेरे में 127,298,522 वोटरों ने हिस्सा लिया, जिनमें 64,620,077 पुरुष, 62,677,232 महिलाएं और 1,213 थर्ड जेंडर वोटर शामिल थे। दोपहर दो बजे तक 48 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
हालांकि, शेरपुर-3 में एक प्रत्याशी की मौत से वहां चुनाव टल गया। देशभर में हिंसा की घटनाएं सामने आईं, गोपालगंज और मुंशीगंज में धमाके ने माहौल बिगाड़ दिया। सबसे गंभीर आरोप ढाका-9 की निर्दलीय उम्मीदवार तस्नीम जारा ने लगाए। खिलगांव मॉडल कॉलेज का दौरा कर उन्होंने कहा कि उनके महिला पोलिंग एजेंट्स को प्रवेश से रोका जा रहा है, परेशान किया जा रहा है।
जारा के मुताबिक, अधिकारी मनमाने नियम थोप रहे हैं, महिलाओं को बहानों से बाहर निकाला जा रहा। पहले भी निर्दलीय महिला प्रत्याशियों ने ऐसी शिकायतें कीं, जिसमें धमकियां और चरित्र हनन शामिल। इन घटनाओं ने चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिणामों का इंतजार है, लेकिन हिंसा और भेदभाव की ये कहानियां बांग्लादेश की लोकतांत्रिक यात्रा पर काला धब्बा बन गई हैं। चुनाव आयोग को कठोर कार्रवाई की उम्मीद है।