
बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनावों के नतीजे एकतरफा रहे। बीएनपी गठबंधन ने 300 में से 212 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया, जबकि 41 राजनीतिक दलों को एक भी सीट नहीं मिल सकी। गुरुवार को 299 निर्वाचन क्षेत्रों में सुबह 7:30 से शाम 4:30 तक मतदान हुआ, जिसमें पहली बार रेफरेंडम भी शामिल किया गया।
ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, 59 पंजीकृत दलों में से 50 ने भाग लिया, लेकिन केवल नौ को सफलता मिली। बीएनपी को 209 सीटें मिलीं, जबकि उसके सहयोगी बांग्लादेश जातीय पार्टी (बीजेपी), गोनोसंहति आंदोलन और गोनो अधिकार परिषद को एक-एक। जमात-ए-इस्लामी गठबंधन ने 77 सीटें हासिल कीं- जमात को 68, एनसीपी को छह, खिलाफत मजलिस को दो और एक अन्य को एक।
गठबंधन की ताकत और सामरिक वोटिंग ने छोटे दलों को नेस्तनाबूद कर दिया। विश्लेषकों का मानना है कि ध्रुवीकरण ने नई पार्टियों के लिए जगह तंग कर दी। जापा जैसी पारंपरिक ताकतवर पार्टी कुरिग्राम में चारों सीटें हार गई, तीन प्रत्याशियों की जमानत जब्त।
चुनाव आयोग के नियमों के तहत कुल वैध वोटों का कम से कम आठवां हिस्सा पाने पर ही 50,000 टका जमानत बचेगी। ये नतीजे बांग्लादेशी राजनीति में बड़े गठबंधनों का बोलबाला बताते हैं। बीएनपी को अब आर्थिक चुनौतियों और बेरोजगारी से निपटना होगा।