
ढाका की सड़कों पर 2025 में अपराध का साया गहरा गया है। राजनीतिक हलचल के बीच कुल 1,81,737 मामले दर्ज हुए, जिनमें महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार के 21,936 केस सबसे ऊपर रहे। हत्याएं 3,785, चोरियां 12,740 और डकैती 1,935 तक पहुंच गईं।
मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार तख्तापलट के बाद स्थिरता लाने में नाकाम रही। बोनिक बार्ता ने पुलिस आंकड़ों से बताया कि लूट 702, अपहरण 1,101, पुलिस पर हमले 601, दंगे 66, स्पीडी ट्रायल 988 और अन्य 81,738 मामले दर्ज हुए।
चार साल की रोजा मणि की हत्या ने देश हिला दिया। तेजगांव से लापता हुई बच्ची का शव 13 मई को तेजकुनीपारा के पास कूड़े में मिला। राजधानी में ही 1,000 से ज्यादा बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के केस सामने आए, स्कूलों-कार्यस्थलों से भी शिकायतें आईं।
ढाका यूनिवर्सिटी के अपराधशास्त्री तौहिदुल हक कहते हैं, ‘राजनीतिक बदलाव के बाद कानून-व्यवस्था बिगड़ी, जिसका सबसे बुरा असर महिलाओं-बच्चों पर पड़ा। टारगेट किलिंग और मॉब लिंचिंग बढ़े हैं। सख्त कानून लागू करना जरूरी।’
यूनुस सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। बिना सुधार के हिंसा का ग्राफ और चढ़ेगा, जो देश के भविष्य के लिए खतरा है।