
ढाका। बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट के अपीलेट डिवीजन ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल की उम्रकैद की सजा को मौत की सजा में बदलने वाली याचिका पर 20 जनवरी को सुनवाई की तारीख मुकर्रर की है। यह फैसला इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) के अभियोजक की अपील पर लिया गया है।
जुलाई के बड़े विद्रोह से जुड़े मानवता विरुद्ध अपराधों के मामले में दोनों नेताओं को मिली सजा को कठोर बनाने की मांग वाली यह अपील 15 दिसंबर को दाखिल की गई थी। जज-इन-चैंबर जस्टिस एमडी रेजाउल हक ने गुरुवार को आदेश जारी कर सुनवाई की तारीख तय की। कोर्ट ने जल्द सुनवाई की गुजारिश पर विचार के बाद यह कदम उठाया।
अभियोजक गाजी एमएच तममी ने कहा कि जुलाई हिंसा के दौरान हुए अपराधों के लिए उम्रकैद पर्याप्त नहीं है। प्रेस ब्रीफिंग में उन्होंने आठ कारण बताते हुए अपील का जिक्र किया। 17 नवंबर को आईसीटी-1 ने एक प्रमुख आरोप में मौत और दूसरे में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
तममी ने जोर देकर कहा कि 30 दिनों के अंदर अपील दाखिल की गई और 60 दिनों में निपटान का नियम पालन होगा। यह मामला बांग्लादेश की अस्थिर राजनीतिक स्थिति में महत्वपूर्ण है, जहां हसीना सरकार के पतन के बाद जवाबदेही की मांग तेज है। सुनवाई का फैसला देश की न्याय व्यवस्था पर असर डालेगा।