
ढाका के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल के खिलाफ फांसी की सजा का विस्तृत 457 पेज का लिखित फैसला प्रकाशित कर दिया। यह दस्तावेज ट्रिब्यूनल की वेबसाइट पर उपलब्ध है और 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की पूरी घटनाक्रम को उजागर करता है, जिसे अदालत ने मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया है।
तीन सदस्यीय बेंच ने नवंबर 2024 में मौखिक फैसला सुनाया था। अब इस पूर्ण दस्तावेज से दो प्रमुख आरोपों पर दोषसिद्धि स्पष्ट हो गई है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, पहला आरोप हसीना के उकसावे से जुड़ा है—14 जुलाई को गणभवन प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शनकारियों को ‘रजाकार’ कहना, डीयू वीसी मक्सूद कमाल से छात्रों को फांसी देने का आदेश, और रंगपुर में अबू सईद की पुलिस फायरिंग में हत्या। इनके लिए उम्रकैद।
दूसरा आरोप, फांसी का आधार, 18 जुलाई को तापोश और इनु के साथ फोन पर ड्रोन ट्रैकिंग व हेलीकॉप्टर हमले के निर्देश, चनखरपुल में 5 अगस्त को छह प्रदर्शनकारियों की हत्या, तथा आशुलिया में छह लोगों की हत्या व शव जलाने की घटनाओं पर टिका है।
अदालत ने हसीना-कमाल की संपत्ति जब्त कर पीड़ितों में बांटने का आदेश दिया। गवाह पूर्व आईजी अल-मामुन को पांच साल की सजा। चेयरमैन जस्टिस मजुमदार ने हसीना को उकसाने, हत्या के आदेश और रोकने में नाकामी का दोषी ठहराया।
भारत निर्वासित हसीना ने फैसले को पक्षपाती बताया। सरकार प्रत्यर्पण मांग रही। एमनेस्टी-एचआरडब्ल्यू ने ट्रायल को अनुचित कहा, यूएन ने फांसी का विरोध किया। यह फैसला बांग्लादेश की राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगा।