
ढाका में फरवरी के आम चुनाव की तैयारी के बीच महिलाओं, लड़कियों और हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएं चिंताजनक रूप से बढ़ रही हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा में नाकामी के आरोप लग रहे हैं।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने पुलिस आंकड़ों के आधार पर बताया कि 2025 की पहली छमाही में लैंगिक हिंसा के मामले पिछले साल से अधिक हुए। महिला अधिकार विशेषज्ञ शुभजीत साहा ने इसे कट्टर धार्मिक गुटों की महिलाओं की आजादी विरोधी बयानबाजी से जोड़ा। मई में इन गुटों ने सरकार के सुधारों का विरोध किया, जिसके बाद उत्पीड़न की बाढ़ आ गई।
हिंदुओं पर अत्याचार भी बढ़े हैं। दिसंबर में दीपूचंद्र दास की भीड़हिंसा से हत्या जैसी घटनाओं सहित 51 मामले दर्ज, जिसमें 10 हत्याएं शामिल। चटगांव हिल ट्रैक्ट्स में जातीय समुदाय सुरक्षा बलों के जुल्म झेल रहे हैं।
देश में दो महिला प्रधानमंत्री रह चुकीं, 2024 आंदोलन में महिलाएं आगे रहीं, फिर भी राजनीतिक दलों का रवैया ठंडा। 51 दलों में 30 ने एक भी महिला प्रत्याशी नहीं उतारा। जमात-ए-इस्लामी के 276 टिकट पुरुषों को। यह चुनाव महिलाओं के लिए सबसे निराशाजनक हो सकता है।
ढाका के एक सेमिनार में नागरिक संगठनों ने चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया। वे कोटा सीटों के खिलाफ हैं, सामान्य चुनाव लड़ना चाहते हैं। चुनाव नजदीक आते ही हिंसा रोकना और समावेश सुनिश्चित करना सरकार के लिए परीक्षा है।