
ढाका। फरवरी में होने वाले संसदीय चुनावों के आगमन के साथ ही बांग्लादेश में हिंसक घटनाओं का सिलसिला तेज हो गया है। निशाना बनाकर हत्याएं और भीड़ हत्या के मामले बढ़ रहे हैं, जिससे आम जनता में भय का वातावरण छा गया है। राजनीतिक वैमनस्य, दबंगई की जंग और निजी रंजिशें हिंसा का प्रमुख कारण बन रही हैं।
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल जनवरी से नवंबर तक देशभर में 3,509 हत्याएं हुईं। मानवाधिकार संगठन आइन ओ सालिश केंद्र ने बताया कि राजनीतिक हिंसा में 102 मौतें दर्ज की गईं, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 45 था। ह्यूमन राइट्स सपोर्ट सोसाइटी ने 123 ऐसी घटनाओं का उल्लेख किया, जो पिछले साल 96 थीं।
कट्टरपंथी नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या ने हालात को और बिगाड़ दिया। प्रमुख हस्तियां अब निजी सुरक्षा के लिए हथियारबंद लोगों को रख रही हैं। 13 दिसंबर को अंतरिम सरकार ने ‘ऑपरेशन डेविल हंट फेज-2’ शुरू किया, जिसका उद्देश्य चुनावी हिंसा रोका।
लेकिन 7 जनवरी को ढाका के कारवान बाजार में बीएनपी के स्वयंसेवक दल के नेता अजीजुर रहमान मोसब्बिर पर बाइक सवार हमलावरों ने गोलियां बरसाईं। वे चाय की स्टॉल पर थे जब हमला हुआ। ढाका-12 के उम्मीदवार सैफुल हक ने कहा, ‘हादी और मोसब्बिर की हत्याओं ने सबको डरा दिया है। सरकार सुरक्षा नहीं दे पा रही। कानून-व्यवस्था सुधरे बिना निष्पक्ष चुनाव असंभव।’
पुलिस महानिदेशक बहारुल आलम ने माना कि हिंसा रोकना चुनौतीपूर्ण है। ऑपरेशन चल रहा है, लेकिन मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के आने के बाद स्थिति खराब हुई है। चुनावी प्रक्रिया पर संकट गहरा रहा है।