
बलूचिस्तान में तनाव चरम पर है। बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने पाकिस्तानी सेना पर अपने नेतृत्व के खिलाफ झूठा प्रचार चलाने का गंभीर आरोप लगाया है। क्वेटा से जारी बयान में बीएनएम ने सेना की इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) विंग के डीजी मेजर जनरल अहमद शरीफ की ओर से लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
बीएनएम नेता नसीम बलूच पर हथियारबंद गतिविधियों का झूठा इल्जाम लगाया गया है, जबकि वे शांतिपूर्ण राजनीतिक संघर्ष चला रहे हैं। संगठन का कहना है कि यह पांचवीं पीढ़ी के युद्ध का हिस्सा है, जिसमें मीडिया ट्रायल और गलत सूचनाओं का सहारा लिया जा रहा है।
बलूचिस्तान में मानवाधिकार हनन की घटनाएं बढ़ रही हैं। बीएनएम ने जीएसपी+ स्कीम के तहत यूरोप में अभियान तेज कर दिया है, जो पाकिस्तान को व्यापारिक लाभ के बदले मानवाधिकारों का पालन करने की बाध्यता डालता है।
‘यह प्रोपेगेंडा सोशल मीडिया पर नकारात्मक माहौल बनाकर कार्यकर्ताओं को खतरे में डालने का प्रयास है,’ बीएनएम ने कहा। सेना के एजेंटों पर राजनीतिक विरोधियों की हत्या की साजिश रचने के पुराने आरोप भी दोहराए गए।
अभियान तेज होने पर पाकिस्तानी सेना और संस्थाओं ने जवाबी प्रचार बढ़ा दिया। बीएनएम ने चेतावनी दी कि शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं को नुकसान पहुंचाने और उनकी साख बिगाड़ने की साजिश विफल होगी। बलूच लोग ऐसी चालों से नहीं डरेंगे।
संगठन ने कहा कि पाकिस्तान के इन कदमों को हर मंच पर चुनौती दी जाएगी। बलूचिस्तान का मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंज रहा है, जहां जीएसपी+ की समीक्षा पाकिस्तान के लिए खतरा बन सकती है। यह टकराव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा संकेत है।