
ढाका में गुरुवार को संसदीय चुनावों की शुरुआत के साथ ही आवामी लीग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से देश को बिखरने से बचाने की गुहार लगाई। पार्टी ने इन चुनावों को महज ‘दिखावा’ बताते हुए गंभीर आरोप लगाए।
आवामी लीग का कहना है कि यह साजिश केवल उन्हें हाशिए पर धकेलने की नहीं, बल्कि कट्टरता विरोधी उदार पार्टियों को भी बाहर करने की है। लाखों समर्थक मतदाताओं को मौत की धमकियां, सरकारी हिंसा और दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वे अपनी इच्छा के विरुद्ध वोट डालने को मजबूर हैं। यह मतदान प्रतिशत बढ़ाने की सुनियोजित चाल है।
चुनावी माहौल में भीड़ का आतंक हावी है, जिसमें लिंचिंग और क्रूर यातनाएं शामिल हैं। जेलें पार्टी कार्यकर्ताओं के अलावा पत्रकारों, मानवाधिकारकर्मियों और युद्ध अपराध विरोधियों से ठसाठस भरी हैं, जिन पर झूठे हत्या के केस थोपे गए।
सरकार गिरने के बाद अल्पसंख्यक विनाश की कगार पर हैं। उन्हें पार्टी समर्थक बताकर हत्याओं को खुली छूट मिली है। महिलाएं, जो आधी आबादी हैं, लोकतंत्र के नाम पर नीति निर्माण से वंचित हैं और भयावह भविष्य का इंतजार कर रही हैं।
चुनाव लड़ रही पार्टियों द्वारा आचार संहिता की अवहेलना के वीडियो सामने आए हैं। यूनुस सरकार पर रेफरेंडम के नाम पर सरकारी धन बर्बाद करने और परिणाम तय करने का आरोप लगाया। यह धर्मनिरपेक्षता विरोधी कदम असंवैधानिक है, जो मुक्ति संग्राम के नायकों के खून से बने संविधान को मिटाने की साजिश है।
पार्टी ने विदेशी पर्यवेक्षकों से अनियमितताओं को उजागर करने की अपील की। यूनुस के वादों पर भरोसा देश को लंबी अस्थिरता में धकेलेगा। पिछले 17 महीनों में बड़े वायदे तोटे गए, देश असहिष्णु गुटों का अड्डा बन गया।
299 सीटों पर वोटिंग जारी है, गणना तत्काल शुरू होगी। आवामी लीग का बयान बांग्लादेश के भविष्य के लिए खतरे की घंटी है।