
बांग्लादेश में फरवरी 2026 के आम चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज है, लेकिन शेख हसीना की अवामी लीग ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। पार्टी पर चुनाव लड़ने का प्रतिबंध लगाने के बाद उसने सोशल मीडिया एक्स पर खुला आरोप लगाया कि यह चुनाव जनता को दरकिनार करने की साजिश है।
अवामी लीग का कहना है कि उसके पास 60 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन है। ऐसे में पार्टी को बैन करके सरकार ने बहुसंख्यक नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर ठहरा दिया। ‘जिस चुनाव में ज्यादातर लोगों को शामिल न किया जाए, वह लोकतंत्र नहीं, बल्कि नियंत्रण का तंत्र है।’
पार्टी ने हसीना के शासनकाल का हवाला देते हुए कहा कि तब किसी भी पंजीकृत दल पर बैन नहीं लगा। मतदान में कमी का कारण बायकॉट था, न कि सरकारी रोक। इस अंतर को मिटाना खतरनाक है। सबसे मजबूत लोकतांत्रिक शक्ति को हटाने से कट्टरपंथियों के लिए रास्ता साफ हो जाता है।
‘जनता द्वारा ठुकराए गए भ्रष्ट और अपराधी तत्वों को फिर से सत्ता की ओर धकेला जा रहा है। बिना विकल्प के चुनाव स्थिरता नहीं लाते, बल्कि अतिवाद को बढ़ावा देते हैं।’ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई कि इस प्रक्रिया को वैध न माने। अवामी लीग के बिना यह चुनाव लोकतंत्र की आत्महत्या है, जिसके परिणाम बांग्लादेश तक सीमित नहीं रहेंगे।
हसीना के सत्ता से अपदस्थ होने के बाद उन्हें मौत की सजा और लंबी कैद सुनाई गई है। अवामी लीग का यह बयान बांग्लादेश की राजनीति में गहरी दरार को उजागर करता है।