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ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय प्रवासियों के खिलाफ अभियानों की निंदा की, नस्लवाद बर्दाश्त नहीं

ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने देश के विभिन्न शहरों में भारतीयों के बढ़ते प्रवास के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की कड़ी निंदा की है। सरकार का कहना है कि देश में इस 'नस्लवाद और जाति पर आधारित अति-दक्षिणपंथी...

Lok Shakti
Lok Shaktiसंवाददाता (Reporter)
|विदेश|
August 30, 2025
ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय प्रवासियों के खिलाफ अभियानों की निंदा की, नस्लवाद बर्दाश्त नहीं
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ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने देश के विभिन्न शहरों में भारतीयों के बढ़ते प्रवास के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की कड़ी निंदा की है। सरकार का कहना है कि देश में इस 'नस्लवाद और जाति पर आधारित अति-दक्षिणपंथी सक्रियता' के लिए कोई जगह नहीं है। आव्रजन के खिलाफ 'मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया' नामक समूह द्वारा सिडनी, मेलबर्न, ब्रिस्बेन, कैनबरा, एडिलेड, पर्थ, होबार्ट सहित कई शहरों में रैलियों का आयोजन किया गया। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की सरकार सप्ताहांत के लिए नियोजित इन रैलियों के खिलाफ है। सरकार ने इन रैलियों की आलोचना करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम समाज में विभाजन और असुरक्षा फैलाने की कोशिश हैं। सरकार का कहना है 'सभी ऑस्ट्रेलियाई लोगों को चाहे उनकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो, हमारे समुदाय में सुरक्षित और स्वागतयोग्य महसूस करने का अधिकार है'। गृह मंत्री टोनी बर्क ने कहा कि देश में उन लोगों के लिए कोई जगह नहीं है जो हमारी सामाजिक एकता को बांटना और कमजोर करना चाहते हैं। उन्होंने साफ कहा कि ऑस्ट्रेलिया इसे सहन नहीं करेगा। ऑस्ट्रेलिया के बहुसांस्कृतिक मामलों की मंत्री ऐनी एली ने कहा कि बहुसंस्कृतिवाद हमारी राष्ट्रीय पहचान का एक अभिन्न और मूल्यवान हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हम सभी आस्ट्रेलियाई लोगों के साथ खड़े हैं, चाहे वो कहीं भी पैदा हुए हों, उन लोगों के खिलाफ खड़े हैं जो हमें बांटना चाहते हैं और प्रवासी समुदायों को डराना चाहते हैं। मंत्री ने कहा कि हम डरेंगे नहीं। नस्लवाद और जातीयतावाद पर आधारित इस तरह की अति-दक्षिणपंथी सक्रियता का आधुनिक ऑस्ट्रेलिया में कोई स्थान नहीं है। पर्यावरण मंत्री मरे वॉट ने कहा कि हम आज हो रही 'मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया' रैली की पूरी तरह से निंदा करते हैं। यह सामाजिक सौहार्द बढ़ाने की बात नहीं, बल्कि नफरत फैलाने और समुदायों को बांटने की कोशिश है। उन्होंने यह भी कहा कि यह रैलियां नव-नाज़ी संगठनों द्वारा आयोजित और प्रचारित की गई हैं। मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया समूह का कहना है 'पिछले 5 साल में जितने भारतीय आए हैं, उतने यूनानी और इतालवी 100 साल में भी नहीं आए। यह एक मामूली सांस्कृतिक बदलाव नहीं, बल्कि पूरी तरह से स्थानापन्न करने की कोशिश है। सोशल मीडिया पर समूह ने कहा कि उनका मकसद है, मुख्यधारा के राजनेताओं में जो साहस नहीं है, उसे हम करेंगे और वह है जनसंख्या प्रवास को समाप्त करने की मांग'.

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