
ईरान में विरोध प्रदर्शनों का दौर तेज हो गया है और अब यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा तथा यूरोपीय संघ ने एकजुट होकर ईरानी शासन की कठोर आलोचना की है। तीनों के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर वहां की जनता के साहस की तारीफ की, जो गरिमा और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार के लिए लड़ रही है।
बयान में प्रदर्शनकारियों पर हत्या, हिंसा, मनमानी गिरफ्तारियां और डराने की रणनीतियों की कड़ी निंदा की गई। आईआरजीसी और बसीज जैसे सुरक्षा बलों से घातक बल प्रयोग तत्काल बंद करने की मांग उठाई गई। अब तक 40 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। शासन को नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए तथा अभिव्यक्ति और सभा की आजादी देनी चाहिए।
प्रदर्शन महंगाई, खराब अर्थव्यवस्था और दमन के खिलाफ हैं। निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के आह्वान पर रात 8 बजे हंगामा बढ़ा। सरकार ने इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल बंद कर दिए। सुप्रीम लीडर खामेनेई ने पीछे न हटने का ऐलान किया और प्रदर्शनकारियों को अमेरिका तथा विपक्ष का एजेंट बताया। ट्रंप के बयान पर निशाना साधा, जिन्होंने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। ईरान का भविष्य अब इस संकट पर निर्भर करता है।