
वाशिंगटन। प्रौद्योगिकी उद्यमी रोमेश वाधवानी ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में सरकारों के आगामी फैसले ही देशों की आर्थिक प्रगति, वैश्विक प्रभाव और सामाजिक स्थिरता को परिभाषित करेंगे।
भारत के एआई इम्पैक्ट समिट से पूर्व सीएसआईएस सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए वाधवानी ने स्वायत्त ‘एआई एजेंट्स’ के उदय पर जोर दिया, जो न्यूनतम मानवीय निगरानी में योजना, क्रियान्वयन और सीख सकने में सक्षम हैं।
उन्होंने कहा कि तीन साल पुरानी जेनरेटिव एआई अब पुरानी पड़ चुकी है। दुनिया ऐसे एआई एजेंट्स की ओर अग्रसर है जो कर्मचारियों की सहायता करेंगे, उनकी जगह लेंगे और अंततः उनसे श्रेष्ठ सिद्ध होंगे।
2025 में 50 लाख से कम एआई एजेंट्स थे, लेकिन अगले पांच वर्षों में 200 प्रतिशत सालाना वृद्धि संभव है। ये एजेंट आपस में समन्वय कर पूर्ण व्यावसायिक प्रक्रियाओं को संभाल लेंगे।
यह परिवर्तन पांच वर्षों में ही घटित होगा, न कि 50 वर्ष बाद। सरकारें एआई की गति से नीतियां नहीं बना पा रही, ठीक वैसे ही जैसे टेलीफोन के आविष्कार के बाद हुआ।
एआई नीतियां भूराजनीति, सुरक्षा, आर्थिक वृद्धि, प्रतिस्पर्धा, नवाचार और सामाजिक स्थिरता को प्रभावित करेंगी। अमेरिका उदार नियमों से नवाचार बढ़ा रहा है, यूरोप कठोर कानूनों पर, चीन राजनीतिक नियंत्रण में।
भारत आर्थिक विकास और बड़े पैमाने पर एआई उपयोग पर केंद्रित है, व्यावहारिक समाधानों, कौशल विकास और कम विनियमों से शीर्ष तीन एआई शक्तियों में शामिल होने को तैयार। एआई से भारत की जीडीपी में 1-1.5 ट्रिलियन डॉलर जुड़ सकते हैं, नई नौकरियां सृजित होंगी।
एआई इम्पैक्ट समिट कार्यान्वयन पर फोकस करता है, विशेषकर वैश्विक दक्षिण के लिए।