अफगानिस्तान में भारी बारिश से उत्पन्न बाढ़ ने भयानक रूप धारण कर लिया है। 26 मार्च से 4 अप्रैल तक चले इस हादसे में कम से कम 77 लोगों की जान चली गई और 137 अन्य घायल हो गए। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, कई प्रांतों में सैकड़ों घर ध्वस्त हो गए, जबकि हजारों एकड़ कृषि भूमि नष्ट हो गई।

चार लोग अभी भी लापता हैं और 3,400 से अधिक मकान प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से सड़कें अवरुद्ध हो गईं, जिससे बचाव कार्य बाधित हो गया। दूरस्थ क्षेत्रों में सहायता पहुंचाना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने बताया कि 3,000 से ज्यादा जेरिब फसल भूमि बर्बाद हो गई और 1,000 से अधिक पशु मर गए। यह तबाही किसानों की आजीविका पर गहरा प्रहार है।
पिछले वर्ष भी ऐसी बाढ़ों ने सैकड़ों जिंदगियां लील ली थीं। जनवरी में भारी बर्फबारी और बारिश से 11 मौतें हुईं। परवान, वरदक, कंधार, जौजजान, फरयाब और बामियान प्रांत सबसे ज्यादा प्रभावित रहे।
तूफानों से नौ घर क्षतिग्रस्त हुए और 530 पशुओं की मौत हुई। बर्फ जमा होने से सड़कें बंद हैं, जिसके लिए तत्काल सफाई अभियान चलाया जा रहा है। ये घटनाएं अफगानिस्तान की आपदा प्रबंधन क्षमता पर सवाल उठाती हैं।
बचाव और पुनर्वास कार्य तेज हो गए हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन के इस दौर में मजबूत तैयारियों की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय सहायता से प्रभावितों को उबारना होगा।
