
पाकिस्तान की काल कोठरियों से धकेलकर लौटे अफगान शरणार्थियों ने ऐसी अमानवीय यातनाओं की पोल खोली है, जिसे सुनकर रूह कांप उठे। कंधार के स्पिन बोलदक सीमा पर पिछले सप्ताह 500 से ज्यादा अफगानों को सौंपा गया। इनकी जुबानी सुनाई गई दास्तांें ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हंगामा मचा दिया है।
अफगानिस्तान के प्रमुख चैनल टोलो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने अफगान अवाम पर दमन का सिलसिला तेज कर दिया है। बिना वजह गिरफ्तारियां, जेलों में अमानुषिक सलूक और जबरन भगावे की घटनाएं बढ़ गई हैं। स्पिन बोलदक-चमन बॉर्डर, जो कभी व्यापार का केंद्र था, अक्टूबर की गोलीबारी के बाद ज्यादातर बंद पड़ा है।
परिवार सहित निर्वासित अख्तर मोहम्मद होतक ने बताया, चमन में कैद के दौरान न खाना मिला, न पानी। एक कमरे में सौ लोग ठूंस दिए गए। अब्दुल सत्तार ने खुलासा किया कि वैध कागजात होने पर भी जेल हुई, जबकि बिना दस्तावेज वाले ने 45 हजार रुपये रिश्वत देकर रिहाई खरीदी।
कराची के कैंप में काम जाते वक्त पकड़े गए मोहम्मद ने कहा, बस अफगान बताने पर ही इतनी पिटाई हुई कि कंधा आज भी दर्द करता है। महिलाओं का अपमान, रातों को नींद न आने देना, आधी रोटी तक नसीब न होना—दोस्त मोहम्मद ने ऐसी क्रूरता बयां की, जिसके वीडियो भी बनाए गए।
विशेषज्ञों ने यूनाइटेड नेशंस और ह्यूमन राइट्स संगठनों से गुहार लगाई है। ईरान-पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों में अफगानों के साथ हो रहा सलूक मानवाधिकारों का उल्लंघन है। दुनिया को जागना होगा, वरना लाखों शरणार्थी बेबस बने रहेंगे।