
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लगातार हो रही सीमा झड़पों ने पाकिस्तान के अंदर आतंकवादी गतिविधियों को नई गति दे दी है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के पहले 11 महीनों में देश में 3,187 लोग आतंकी हिंसा का शिकार हो चुके हैं, जिनमें निर्दोष नागरिक और सुरक्षा बल शामिल हैं। वहीं 1,981 लोग घायल हुए हैं। यह संख्या पिछले साल की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है।
इस्लामाबाद के एक प्रमुख थिंक टैंक की रिपोर्ट बताती है कि अफगानिस्तान के साथ चल रहे सीमा विवाद ने पाकिस्तान को दोहरी मार दी है। एक तरफ सैन्य खर्चों में इजाफा हो रहा है, दूसरी तरफ आंतरिक आतंकी हमलों से जूझना पड़ रहा है। वित्त मंत्रालय ने पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर तनाव बढ़ने के कारण रक्षा खरीद के लिए नई मंजूरी दी है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह लंबा संघर्ष पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को चरमरा सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने इन हमलों के लिए तालिबान समर्थित गुटों को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि काबुल ने इसे गलत प्रचार करार दिया। अफगानिस्तान ने उल्टा पाकिस्तान पर आईएस जैसे संगठनों को इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद पाकिस्तान में हमले तेज कर दिए हैं। हालिया पाकिस्तानी हवाई हमलों को टीटीपी पर नियंत्रण की हताशा माना जा रहा है, जिसके जवाब में तालिबान ने सीमा पर भारी गोलीबारी की। इससे 44 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक शहीद हुए।
पूर्व राजनयिक जावेद हुसैन ने कहा कि अफगानिस्तान में लंबी जमीनी कार्रवाई से बचना चाहिए। दक्षिण एशिया विशेषज्ञ मीर मुस्तफिजुर रहमान ने चेताया कि पाकिस्तान की नाजुक अर्थव्यवस्था पर यह संघर्ष भारी पड़ सकता है, जहां आईएमएफ सहायता, गिरती मुद्रा और महंगाई पहले ही चुनौती बनी हुई है। सीमा तनाव और आतंकी हमले पाकिस्तान की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं।



