इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। इजरायल के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के जवाब में ईरान ने कतर और यूएई के गैस संयंत्रों को निशाना बनाया। इस बीच, सऊदी अरब की राजधानी रियाद में 12 अरब व इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों ने बैठक की और ईरान को तत्काल हमले बंद करने का निर्देश दिया।

अजरबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्की व यूएई के मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर ईरान की कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने रिहायशी इलाकों, डिसेलिनेशन प्लांट, एयरपोर्ट, तेल सुविधाओं व राजनयिक केंद्रों पर हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।
लेबनान पर इजरायली हमलों की भी भर्त्सना की गई और क्षेत्रीय स्थिरता का समर्थन दोहराया। कतर के रास लफ्फान में आग लगने व सऊदी में बैलिस्टिक मिसाइलें रोकी जाने की घटनाओं ने ऊर्जा क्षेत्र को खतरे में डाल दिया।
कतर ने ईरानी सैन्य व सुरक्षा अटैचियों को पर्सोना नॉन ग्राटा घोषित कर 24 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दिया। संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव 2817 का हवाला देते हुए इसे संप्रभुता पर हमला कहा। कतर ने तटस्थता की नीति पर कायम रहने का वादा किया, लेकिन ईरान की जिम्मेदारियां न निभाने पर चिंता जताई।
मंत्रियों ने चेतावनी दी कि ईरान के साथ रिश्ते संप्रभुता का सम्मान व गैर-हस्तक्षेप पर टिके हैं। सैन्य धमकियों से बचें, वरना परिणाम बुरे होंगे। यह बयान मध्य पूर्व में शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
