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अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी के बीच एस्ट्रोनॉट्स कैसे रखते हैं फिटनेस

अंतरिक्ष की वजनहीन स्थिति में मानव शरीर को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स की हड्डियां हर महीने 1 प्रतिशत तक कमजोर हो जाती हैं और मांसपेशियां...

Lok Shakti
Lok Shaktiसंवाददाता (Reporter)
|टेक्नोलॉजी|
March 7, 2026
अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी के बीच एस्ट्रोनॉट्स कैसे रखते हैं फिटनेस
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अंतरिक्ष की वजनहीन स्थिति में मानव शरीर को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स की हड्डियां हर महीने 1 प्रतिशत तक कमजोर हो जाती हैं और मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं। पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण हड्डियों-मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखता है, लेकिन स्पेस में यह दबाव नदारद होने से शरीर बुजुर्गों जैसा कमजोर हो सकता है।

इस खतरे से निपटने के लिए एस्ट्रोनॉट्स प्रतिदिन औसतन दो घंटे कड़ी एक्सरसाइज करते हैं। नासा के एडवांस्ड रेसिस्टिव एक्सरसाइज डिवाइस (एआरईडी), जो 2008 में स्थापित हुआ, पिस्टन और फ्लाईव्हील से 600 पाउंड तक प्रतिरोध देता है। इससे स्क्वाट्स, डेडलिफ्ट्स जैसी वर्कआउट संभव होती हैं।

टी2 ट्रेडमिल पर हार्नेस और बंजी से बंधकर वे दौड़ते हैं, ताकि उड़न न भरें। साइकल एरगोमीटर (सीईवीआईएस), 2001 से चालू और 2023 में अपग्रेड, कंप्यूटर नियंत्रित वर्कलोड, हार्ट रेट दिखाता है तथा वाइब्रेशन अलग रखता है।

एरोबिक और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग का मिश्रण अब हाई-इंटेंसिटी, कम समय वाला है, जो अध्ययनों में बेहतर साबित हुआ। इससे मांसपेशी-हड्डी संरक्षण अच्छा रहता है और मिशन कार्यों के लिए समय बचता है। वीओ2 मैक्स जांच से लंबे उड़ानों में ऑक्सीजन क्षमता घटी पाई गई। प्री-फ्लाइट ट्रेनिंग से प्रदर्शन सुधरता है, बायोप्सी से आणविक स्तर पर सुरक्षा दिखी। हालांकि, जगह की तंगी, मरम्मत, गर्मी-नमी चुनौतियां बनी रहती हैं। ये प्रयास भविष्य के लंबे मिशनों की नींव हैं।

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