
भारत का स्टार्टअप जगत महिलाओं के लिए नई उम्मीदें जगा रहा है। 2025 में महिला सह-संस्थापकों वाले टेक स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण की फंडिंग में 12 प्रतिशत की शानदार वृद्धि हुई, भले ही कुल फंडिंग में मामूली कमी आई। सोमवार को जारी रिपोर्ट ने अधिग्रहणों में भारी उछाल की भी पुष्टि की है।
रिपोर्ट के आंकड़ों से साफ है कि अर्ली-स्टेज फंडिंग 478 मिलियन डॉलर से बढ़कर 533 मिलियन डॉलर हो गई, हालांकि डील्स की संख्या 93 से घटकर 79 रह गई। अधिग्रहणों की संख्या 12 से कूदकर 33 हो गई, जो मजबूत बिजनेस मॉडल का प्रमाण है।
कुल इक्विटी फंडिंग 1.1 अरब डॉलर से घटकर 1 अरब डॉलर रही, फंडिंग राउंड्स 29 प्रतिशत कम होकर 405 पर सिमट गए। सीड फंडिंग में 24 प्रतिशत की गिरावट आई, 342 मिलियन से 261 मिलियन डॉलर। लेट-स्टेज में 35 प्रतिशत की कमी के साथ 213 मिलियन डॉलर जुटे।
आईपीओ की संख्या दो रह गई। बेंगलुरु ने 384 मिलियन डॉलर (38 प्रतिशत) हासिल किए, मुंबई ने 112 मिलियन (11 प्रतिशत)।
यह रिपोर्ट बताती है कि चुनौतियों के बावजूद महिला उद्यमी मजबूती से आगे बढ़ रही हैं। अर्ली फंडिंग और अधिग्रहणों की तेजी भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत देती है।