
समुद्र की लहरें कभी नीली, कभी हरी, तो कभी पीली या लाल नजर आती हैं। यह रंगों का जादू सूर्य की किरणों, सूक्ष्म जीवों और पानी के रासायनिक तत्वों की संयुक्त क्रिया से होता है। नासा के विशेषज्ञों के अनुसार, शुद्ध पानी नीली रोशनी को परावर्तित करता है, जबकि फाइटोप्लांकटन से भरे क्षेत्र हरे दिखते हैं।
क्लोरोफिल युक्त ये सूक्ष्म शैवाल पोषक तत्वों पर पनपते हैं, जिससे तटीय इलाके हरे हो जाते हैं। गहरे समुद्र नीले रहते हैं। पीला या लाल रंग खनिजों, कार्बनिक पदार्थों या शैवाल प्रस्फुरण से आता है। ये बदलाव समुद्री जीवन की सेहत का आईना होते हैं।
वैज्ञानिक उपग्रहों से इन रंगों का विश्लेषण कर हानिकारक शैवाल प्रस्फुरण का पूर्वानुमान लगाते हैं। ये जहरीले हमले मछलियों और मनुष्यों के लिए खतरा बनते हैं। रंग डेटा से जल गुणवत्ता जांच, मछली पकड़ने के क्षेत्र चिह्नित और संसाधन प्रबंधन सुगम होता है।
नासा का पीएसीई मिशन, फरवरी 2024 में प्रक्षेपित, प्रकाश की बारीक तरंगदैर्ध्य मापता है। यह प्लैंकटन वितरण, बादल-एरोसोल प्रभाव और जलवायु परिवर्तन का अध्ययन करता है। नोआए के साथ मिलकर यह डेटा जल प्रबंधन, आपदा पूर्व चेतावनी और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए उपलब्ध कराता है।
समुद्र के ये रंग बदलाव जलवायु संकट में महत्वपूर्ण हैं। बेहतर निगरानी से हम समुद्री धरोहर को बचा सकेंगे।