
रात के आकाश में जब चांद क्षितिज से उगता है, तो उसका विशालकाय रूप देखकर हर कोई दंग रह जाता है। पहाड़ों या इमारतों के पीछे से निकलता यह चांद बड़ा और चमकीला क्यों लगता है? नासा के वैज्ञानिक स्पष्ट करते हैं कि यह कोई वास्तविक बदलाव नहीं, बल्कि आंखों और दिमाग का खेल है।
चांद का व्यास हमेशा 3475 किलोमीटर का ही रहता है। फोटो और माप से सिद्ध होता है कि ऊंचाई पर या क्षितिज पर आकार समान रहता है। फिर भ्रम क्यों? दिमाग दूरी का अंदाजा लगाते हुए आसपास के परिदृश्य से तुलना करता है। पेड़-पौधे, समुद्र या शहर चांद को दूर दिखाते हैं, इसलिए बड़ा प्रतीत होता है।
आसान परीक्षण: चांद के पास अंगूठे को फैलाकर रखें, आकार बराबर लगेगा। कागज की नली से देखें तो भ्रम टूट जाता है। कैमरे से एक ही सेटिंग पर ऊपर-नीचे की तस्वीरें लें, समानता साफ दिखेगी।
रंग का रहस्य वायुमंडलीय प्रभाव से है। लंबा सफर तय करते हुए नीली किरणें बिखर जाती हैं, पीली-नारंगी बचती हैं। प्रदूषण इसे और गहरा बनाता है।
पोंजो भ्रम जैसी व्याख्याएं प्रचलित हैं, जहां पृष्ठभूमि चांद को विशाल बनाती है। अंतरिक्ष यात्रियों को भी ऐसा होता है, जो दिमाग की गहरी प्रक्रिया दर्शाता है। यह अनसुलझा रहस्य हमें अपनी इंद्रियों पर सवाल उठाने को मजबूर करता है। अगली बार खुद जांचें।