
नई दिल्ली में केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए उत्साह चरम पर है, लेकिन शेयर बाजार में तनाव साफ दिख रहा है। 2010 से 2022 तक के आंकड़े गवाही देते हैं कि बजट से एक हफ्ता पहले निफ्टी का औसत रिटर्न -0.52 प्रतिशत रहता है। 15 वर्षों में केवल 8 बार ही यह बढ़त के साथ बंद हुआ। नीतिगत बदलावों का डर मुख्य वजह है।
बजट वाले दिन इंट्राडे उतार-चढ़ाव औसतन 2.65 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। पिछले पांच सालों में चार बार प्री-बजट महीने में गिरावट दर्ज की गई, जिसमें जनवरी 2025 शामिल है। अच्छी बात यह कि बजट के बाद औसतन 1.36 प्रतिशत की रिकवरी होती है।
जेएम फाइनेंशियल के राहुल शर्मा का मानना है कि बजट में वित्तीय अनुशासन के साथ विकास पर जोर होगा, खासकर ट्रंप की टैरिफ नीतियों के बीच। इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस, रेलवे में कैपेक्स बढ़ेगा। एमएसएमई, मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, एआई और निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा।
फिस्कल डेफिसिट 4.4 प्रतिशत जीडीपी पर रहेगा, जो 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को सपोर्ट करेगा। केयर रेटिंग्स ने भी यही अनुमान लगाया है, जिसमें वित्त वर्ष 2027 में 4.2-4.3 प्रतिशत की संभावना है।
जोखिम बरकरार हैं—उच्च वैल्यूएशन, एफआईआई बिकवाली, एआई बबल, भू-राजनीतिक तनाव। निवेशक नकदी रखें और डिफेंस, पीएसयू बैंक पर नजर रखें।