
देश में मार्च से ही आगजनी की खबरें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मध्य प्रदेश, दिल्ली और नोएडा में भयानक आग ने भारी तबाही मचाई है। गर्मी की चरम सीमा अभी बाकी है, फिर भी आग क्यों इतनी बेकाबू हो जाती है? इसका राज है सूर्य की उत्तरायण गति और लू की तपिश।
मकर संक्रांति के बाद सूर्य उत्तर की ओर झुकता है। पृथ्वी का 23.5 डिग्री का झुकाव शुरुआत में उत्तरी इलाकों को तिरछी किरणें देता है, जिससे सर्दी बनी रहती है। मार्च अंत तक सूर्य भूमध्य रेखा पर आ जाता है, दिन-रात बराबर हो जाते हैं।
अप्रैल से जून तक सूर्य की सीधी किरणें उत्तरी गोलार्ध को झुलसा देती हैं। 21 जून को कर्क रेखा पर सूर्य के ठीक ऊपर होने से लू का कहर चरम पर होता है। ज्वलनशील वस्तुओं का प्रज्वलन बिंदु नीचे आ जाता है, छोटी चिंगारी भी जंगल की आग बन जाती है।
उत्तर भारत में जमीन ज्यादा और पानी कम होने से गर्मी तेजी से फैलती है। खेतों में फसल अवशेष, शहरों में कचरा और बिजली तारों की चिंगारी बड़ी मुसीबत बनते हैं। जुलाई तक यह सिलसिला जारी रहता है।
आग रोकने के लिए जागरूकता, बेहतर अग्निशमन व्यवस्था और हरियाली जरूरी है। जलवायु परिवर्तन के दौर में ये घटनाएं और भयावह होंगी, तैयार रहना होगा।