
नई दिल्ली में उत्साह का माहौल है क्योंकि अमेरिका के साथ नया व्यापार समझौता भारत के 2030 तक 100 अरब डॉलर के वस्त्र निर्यात लक्ष्य को गति देने वाला साबित हो रहा है। शनिवार को सरकार ने घोषणा की कि इस डील से अमेरिकी बाजार 20 प्रतिशत से अधिक का योगदान देगा।
वस्त्र मंत्रालय ने इस ऐतिहासिक समझौते का स्वागत किया है, इसे दोनों देशों के बीच वस्त्र व्यापार को मजबूत करने वाले प्रमुख कदम के रूप में देखा जा रहा है। उद्योग जगत इसे क्षेत्र के लिए आर्थिक क्रांति का प्रतीक मान रहा है।
अमेरिका के 118 अरब डॉलर के वैश्विक आयात बाजार के द्वार खुल गए हैं, जहां भारत वर्तमान में 10.5 अरब डॉलर का निर्यात करता है। इसमें 70 प्रतिशत परिधान और 15 प्रतिशत तैयार वस्त्र शामिल हैं। यह अवसर अपार है।
सभी वस्त्र उत्पादों पर 18 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क बांग्लादेश (20%), चीन (30%), पाकिस्तान (19%) और वियतनाम (20%) जैसे प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर स्थिति प्रदान करेगा। मंत्रालय के अनुसार, बड़े खरीदार अपनी खरीद नीतियों पर पुनर्विचार करेंगे।
यह डील उद्योग को अमेरिका से मध्यवर्ती सामग्री आयात करने में सक्षम बनाएगी, जोखिम कम करेगी और लागत प्रभावी बनेगी। देश में मूल्य संवर्धन बढ़ेगा, उत्पाद विविधता आएगी, रोजगार सृजन होगा और अमेरिकी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
यह समझौता भारत के वस्त्र क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा, जो वैश्विक पटल पर मजबूत स्थिति सुनिश्चित करेगा।